भोपाल। सायंकालीन स्वदेश संवाददाता
गौतम नगर इलाके में छेड़छाड़ से परेशान होकर सुसाइड करने वाली बीकॉम की छात्रा के मामले में जिला अदालत में वकील पैरवी नहीं करेंगे। साथ ही गीतांजलि कॉलेज को शिफ्ट करने की मांग अब उठने लगी है। लोगों का कहना है कि कॉलेज को वहां से शिफ्ट किया जाना चाहिए, जिससे इस तरह की घटना आगे से ना हो। क्योंकि कॉलेज जाते समय छात्राओं के साथ खुलेआम छेड़छाड़ होती है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र रावत ने बताया कि छात्रा को न्याय दिलाने के लिए अब कोई भी वकील पैरवी नहीं करेगा। साथ ही कॉलेज को भी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। घटना से गुस्साए एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया। बाद में पुलिस के अफसरों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ। हत्या के प्रयास की धारा बढऩा चाहिए छात्रा के फांसी लगाने से पहले जब वह कॉलेज से घर लौट रही थी, तब दानिश ने उसके पैर पर एक्टिवा चढ़ा दी थी।
 साथ ही एक्टिवा दौड़ाकर जान लेने की कोशिश भी की थी। फोन पर भी वह उसकी जान से मारने की धमकी देता था। यह बात परिजनों ने पुलिस को बताई है। अब पुलिस इस मामले में हत्या के प्रयास की धारा बढ़ा सकती है।  केस की निगरानी के लिए विशेष टीम एएसपी जोन-3, राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इस मामले की मॉनीटरिंग करने के लिए विशेष टीम बनाई गई है। जिसके प्रभारी सीएसपी हनुमानगंज ग्लेडविन कार बनाया गया है।

 इसमें वह परिजनों के आरोपों की जांच भी कर रहे हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अफसरों ने आरोपी दानिश के घर के बाहर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं। जिससे उसके घर किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो सके। आरोपी के परिजनों ने भी पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी।
ये आरोप लगाए हैं परिजनों ने
-साथ पढऩे वाली छात्राओं ने उसकी जबरदस्ती दानिश से दोस्ती कराई।
-सुसाइड करने से पहले आरोपी दानिश ने उस पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की थी।
-मिलने के लिए आए दिन फोन पर धमकी देता था आरोपी।
-बीच रास्ते में आए दिन करता था छेडख़ानी।
-सहेलियां भी दानिश से मिलने के लिए उस पर दबाव बनाती थी।
क्यों नहीं हटाया गया टीआई को
छात्रा की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ता रहा है। थाने के अंदर आरोपी दानिस खान को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के भी आरोप हैं। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की कि गौतम नगर टीआई मुख्तार कुरैशी के कारण आरोपी दानिस को थाने में वीआईपी ट्रीटमेंट मिला। मुख्तार कुरैशी को थाने से हटाया जाए, नहीं तो इनकी वजह से आरोपी के खिलाफ साक्ष्य से छेड़छाड़ हो सकती है। ऐसे में टीआई को हटा देना चाहिए।

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