भोपाल। शहर में माता मंदिर क्षेत्र कहां है, यह पता शहर के किसी भी कोने में जाकर अगर कोई पूछे तो पूरी जानकारी मिल जाएगी। लेकिन, जिस कारण से यह जगह मशहूर हुई है वह है वहां स्थित प्राचीन शीतला माता का मंदिर।

टीटी नगर स्थित माता मंदिर सालों से राजधानीवासियों की आस्था का केन्द्र रहा है। मान्यता है कि यहां स्थित मां शीतला के त्रिशुल पर चुनरी बांधने से हर मुराद पूरी होती है। अपनी मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए दूर-दूर से यहां भक्त आते हैं और मन्नत पूरी हो जाने पर हवन अनुष्ठान भी कराते हैं।

प्राचीन माता मंदिर के पुजारी पं. राजीव चतुर्वेदी ने बताया कि यूं तो पूरे साल मंदिर में अनुष्ठान जारी रहते हैं। होली, दिवाली, महाशिवरात्रि समेत अन्य सभी त्यौहारों पर विशेष पूजा अर्चना व हवन आदि किए जाते हैं। नवरात्र में हजारों भक्त मंदिर आते हैं। इसके साथ ही मंदिर में शनिदेव भी विराजमान हैं, जिनपर रोजाना भक्तों द्वारा तेल चढ़ाकर पूजा अर्चना की जाती है।

पं. चतुर्वेदी ने बताया कि शनिदेव की प्रतिमा सालों पहले एक श्रद्धालु दान स्वरूप मंदिर में देकर गया था। जिसे यहां विराजमान कराया गया है। इसके साथ ही शनिदेव की शिला जयपुर से मंगाई गई थी। खास बात यह है कि शिला का आकार उतना ही रखा गया जितना शनि शिंगणापुर में है। हर शनिवार को 6 से 10 किलोग्राम तेल शनिदेव पर भक्तों द्वारा चढ़ाया जाता है, इस तेल का इस्तेमाल गौसेवा के लिए किया जाता है। साथ ही इसी तेल से शनिदेव के सामने अखंड ज्योत भी प्रज्ज्वलित की जाती है।

मंदिर में पंच कुंडीय यज्ञ स्थल भी

मंदिर में दो स्थाई यज्ञ स्थल भी हैं, जिनमें से एक यज्ञ स्थल पर पांच कुंडीय यज्ञ है। पं. चतुर्वेदी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अगर मंदिर में हवन सामग्री लेकर आता है, तो स्वैच्छिक दक्षिणा पर अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्र के दिनों में तो मंदिर की ओर से ही हवन सामग्री की व्यवस्था रहती है, जिसमें कोई भी माता का भक्त शामिल हो सकता है।

नवाबी दौर में निकली थी मां की प्राचीन प्रतिमा, चौथी पीढ़ी कर रही पूजा-पाठ

पं. राजीव चतुर्वेदी ने बताया कि वर्तमान में वे इस मंदिर में नियमित पूजा-पाठ करते हैं। मंदिर की सेवा करने वाली चौथी पीढ़ी के वे सदस्य हैं। चतुर्वेदी ने बताया कि नवाबी दौर में खुदाई के दौरान यहां शीतला माता की एक प्राचीन प्रतिमा निकली थी। जिसके बाद यहां मंदिर निर्माण किया गया। आज प्राचीन माता मंदिर भव्य रूप ले चुका है। अब यहां मां शीतला के साथ ही मां काली, मां दुर्गा, शिव दरबार, राम दरबार, हनुमानजी, शनिदेव वा साईं दरबार भी है। जिनका दिन में नियमित दो बार श्रंगार किया जाता है। रोजाना महाआरती व प्रसाद वितरण भी होता है।

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