मांडू। भारत के दौरे पर आई हिलेरी क्लिंटन ने मांडू के इतिहास के साथ बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेमगाथा का दीदार किया। अपनी भव्यता की कहानी कहते मांडू के महलों के खंडहर इतिहास के उत्थान और पतन का आईना है। आईए जानते हैं कि क्या खास बात है इस नगरी में जो हिलेरी को यहां खींच लाई..

ताजमहल की झलक दिखलाता सफेद संगमरमर का होशंगशाह का मकबरा या झूले की माफिक झूलता प्रतीत होता हिंडोला महल, पानी के बीच जहाज का अक्स दिखाता जहाज महल या फिर बाज बहादुर और रानी रूपमति की मोहब्बत को बुलंदी पर पहुंचाने वाला रानी रूपमति का महल। ऐसे कई नगीने मांडू के ताज में जड़े हुए हैं जिसकी वजह से मांडू पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है और विदेशी मेहमान भी इसकी हसीन वादियों और बिखरे हुए इतिहास की एक झलक पाने के लिए खींचे चले आते हैं।

कुदरत की बेमिसाल खूबसूरती से शुमार माण्डू में बारिश के वक्त काफी दिलकश नजारा होता है। आसपास से गुजरते बादलों के बीच आसमान में उड़ने का अहसास होता है।

जहाज महल- मांडू का सबसे प्रमुख आकर्षण है जहाज महल। जहाज महल दो तालाबों कापुर तालाब और मुंज तालाब के बीच में बना हुआ है। इसका निर्माण खिलजी राजवंश के सुलतान गयासुद्दीन खिलजी ने करवाया था। इस महल में कई फव्‍वारे और नहरें है जिनमें अभी भी पानी बहता रहता है। इस महल में दो मंजिला इमारत के साथ, नक्काशीदार खंभे, मेहराब और उम्दा छतरियां बनी हुई है।

रानी रूपमति का महल- बाज बहादुर रानी रूपमति से बेइंतहा प्यार करते थे और रूपमति की मोहब्बत में वह इस हद तक लीन रहते थे कि उनकी मोहब्बत के किस्से दिल्ली में मुगल दरबार तक सुनाई देते थे साथ ही रूपमति के रूप के भी चर्चे काफी मशहूर थे। रानी रूपमति नर्मदा दर्शन के पश्चात ही भोजन ग्रहण करती थी इसलिए रानी रूपमति की ईच्छा का सम्मान करते हुए बाजबहादुर ने एक ऊंची पहाड़ी पर महल का निर्माण करवाया जिससे रानी को नर्मदा दर्शन सुलभ हो जाएं।

हिंडोला महल- हिंडोला महल अपने झूलते हुए स्वरूप की वजह से विख्यात है। इसका निर्माण होशंगशाह के शासन काल में किया गया था। इस महल का उपयोग मुख्यत: दरबार के रूप में किया जाता था और इस महल में बैठकर राजा अपनी प्रजा की समस्या को सुनते थे। इस महल की दिवारें 77 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं, जिसके कारण इसे हिंडोला महल कहा जाता है।

होशंगशाह का मकबरा- कहा जाता है मुगल सम्राट शाहजहां ने ताजमहल के निर्माण से पहले 1669 में उस्ताद हमीद खान को इस मकबरे के अवलोकन के लिए भेजा था। होशंगशाह के मकबरे का निर्माण सुल्तान होशंगशाह गौरी ने 1405 में करवाया था। होशंगशाह को मालवा का पहला इस्लामी राजा माना जाता है, जिसने अपने 27 साल के शासन में माण्डू को वास्तुकला की एक नई और उम्दा पहचान दी।

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