कुछ  दिन पहले आए वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) के आंकड़ों का एक संकेत है कि चीन को पछाड़ते हुए भारत दुनिया में सबसे तेज गति से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। अक्टूबर-दिसंबर, 2017 में जीडीपी की वृद्धि दर 7.2 फीसदी पर जा पहुंची है, जबकि चीन की दर फिलहाल 6.8 फीसदी है। वृद्धि दर का सकारात्मक और तीव्रतर होना अर्थव्यवस्था के उभार का सूचक है। जीडीपी की बेहतरी यह भी बताती है कि निवेशकों का भरोसा बहाल ही नहीं है, अपितु बढ़ा है। जीडीपी में यह बढ़ोतरी मोदी सरकार के लिए अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर राहत देने वाली है। उल्लेखनीय है कि जब वित्त वर्ष २०१७-१८ की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी वृद्धि दर ६.५ प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष में 5.7 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, तो विपक्षी दलों एवं अनेक विद्वानों ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना की थी। तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में अचानक गिरावट के लिए हमेशा की तरह नोटबंदी और जीएसटी को जिम्मेदार बताया गया। भाजपा एवं मोदी विरोधी राजनीतिक दलों एवं उनके समर्थकों ने जीडीपी में आई कमजोरी को केंद्र सरकार को घेरने के अवसर के रूप में देखा। किंतु, उन सब आर्थिक विश्लेषकों के आकलन को नये आंकड़े ने ध्वस्त कर दिया है। बैड लोन और सुस्त होती अर्थव्यवस्था के लिए आलोचना झेल रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए तो यह राहत भरी खबर थी ही, इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति फिर से निवेशकों में भरोसा बढ़ा है। अब जब एक बार फिर भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गई है तो निवेशक भारत में निवेश के लिए आकर्षित होंगे। यह सर्वविधित है कि निवेश के बढऩे से कंपनियों के लिए कारोबार बढ़ाने के अवसर पैदा होते हैं। बाजार में मांग और आपूर्ति का सिलसिला मजबूत होता है। भारत में इस समय रोजगार का प्रश्न ज्वलंत है। मोदी सरकार पर भी वायदे के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने के लिए दबाव है। सरकार की आलोचना हो रही है कि वह युवाओं को अपेक्षित रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रही है। निश्चित ही मजबूत अर्थव्यवस्था में रोजगार के अच्छे और अधिक अवसर सृजित होते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि जीडीपी की यह वृद्धि सरकार को रोजगार के अवसर पर भी राहत दे सकती है। वैसे भी जब से रोजगार को लेकर सरकार की आलोचना प्रारंभ हुई है, सरकार के विभिन्न विभागों ने बड़ी संख्या में नौकरियां उपलब्ध कराने के प्रयास प्रारंभ किए हैं। इस संदर्भ में ही केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के उस ट्वीट को देखना चाहिए, जिसमें उन्होंने यह सूचित किया है कि रेलवे 90 हजार नौकरियां लेकर आया है। बहरहाल, केंद्र सरकार को प्रयास करना होगा कि जीडीपी वृद्धि ने फिर से जो गति पकड़ी है, उसमें और तेजी आए। 

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