केंद्र सरकार ने किडनी की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए आयुर्वेदिक औषधियों को जिला अस्पतालों में उपलब्ध कराने का फैसला लिया है.  

स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, फिलहाल देश के 512 जिला अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है. जिसके तहत अब तक दस लाख से भी ज्यादा डायलिसिस सेशन जिला अस्पतालों में हो चुके हैं.

इसके अलावा जिस दवा को जिला अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाएगा उनमें से एक नीरी केएफटी पर हाल ही में इंडो अमेरिकी जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में शोध प्रकाशित हुआ है.

सबसे दिलचस्प बात तो यह कि सीटी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज ने चूहों के पांच समूहों पर परीक्षण करने के बाद दवा को प्रमाणित किया है. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग ने भी नीरी केएफटी आयुर्वेदिक फार्मूले के प्रभाव का गहन अध्ययन किया है.

कैसे मदद कर रही है ये दवा...

बताया जा रहा है कि नीरी केएफटी दवा के इस्तेमाल से गुर्दा रोगियों में भारी तत्वों, मैटाबोलिक बाई प्रोडक्ट जैसे केटेनिन, यूरिया, प्रोटीन आदि की मात्रा तेजी से नियंत्रित हो रही है. पोंडीचेरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने भी एक शोध में दावा किया है कि यदि गुर्दे की सेहत बढ़ाने वाले आयुर्वेदिक फार्मूलों का इस्तेमाल किया जाए तो काफी हद तक डायलिसिस से बचा जा सकता है.

18% पुरुष और 21% महिलाएं मोटापे के चपेट में....

डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2025 तक भारत समेत विश्व में 18 फीसदी पुरुष और 21 फीसदी महिलाएं मोटापे की चपेट में होंगी. अध्ययन में सामने आया कि उन्हें तब सबसे ज्यादा खतरा गुर्दा रोगों का होगा. इसलिए जीवनशैली में सुधार कर लोगों को इन खतरों से बचना होगा. गुर्दे की बीमारियों से बचाव के लिए डब्ल्यूएचओ ने भी वैकल्पिक उपचार और खराब हो चुके गुर्दा रोगियों को बचाने के लिए गुर्दा दान को बढ़ावा देने की पैरवी की है.

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