केंद्र के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भी बजट में खेती-किसानी का विशेष ध्यान दिया है। केंद्र की तरह अगले वर्ष मध्यप्रदेश सरकार को भी चुनाव का सामना करना है। वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। यह बात सरकार भी जानती है और शेष अन्य भी। यही कारण है कि विभिन्न दबाव समूहों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के किसान अपनी समस्याओं को लेकर आक्रोशित हैं। पिछले वर्ष उन्होंने सरकार के समक्ष अपना आक्रोश व्यक्त भी किया था। किसानों की मेहनत के बल पर लगातार पाँच बार से कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त कर रही सरकार किसी भी सूरत में किसानों को नाराज नहीं करना चाहती। वैसे भी केंद्र की भाजपा सरकार हो या फिर प्रदेश की भाजपा सरकार, दोनों ही यह भरोसा दिलाते हैं कि वह किसानों के हित की चिंता करती हैं। किसानों की आय को दोगुना करने के लिए ठोस नीति पर काम भी कर रही हैं। बहरहाल, मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्य के वित्तमंत्री जयंत मलैया ने वर्ष 2018-19 का दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया। इस बजट में खेती, कर्मचारियों, स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी पर खास जोर दिया गया है। भाजपा सरकार का यह 14वां और मलैया का पांचवां बजट है। इस बजट में 26,780 करोड़ रुपये का घाटा दर्शाया गया है। वित्तमंत्री मलैया ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 37,498 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना 'भावांतरÓ के लिए तीन करोड़ का प्रावधान किया है। इसके साथ ही बजट में कृषि समृद्धि योजना के लिए 3650 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया है। अच्छी बात यह है कि सरकान ने सिर्फ अपनी दृष्टि को खेती और किसान तक सीमित करके नहीं रखा है, बल्कि उसने ग्रामीण क्षेत्रों का समग्रता से ध्यान रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को प्रोत्साहन करने की नीति भी बजट में दिखाई दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में पूंजी निवेश पर सरकार 40 फीसदी तक अनुदान देगी। वित्तमंत्री मलैया ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवा के मामले में मध्यप्रदेश १७वें स्थान पर है। सरकार शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में और भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रयासरत है। वित्तमंत्री ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 10 बिस्तर का अस्पताल खोलने पर अनुदान देगी। सरकार का दावा है कि उसकी स्वास्थ्य योजना से 77 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने सिचाई, बिजली एवं पशु पालन के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए हैं। बजट में सरकार ने यह भी दावा किया है कि मध्य प्रदेश की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। देश की अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश का हिस्सा अब बढ़कर 3.84 प्रतिशत हो गया है। यह निश्चित ही सरकार के लिए राहत की बात है। अपने इस आंकड़े आधार पर वह जनता को बता सकती है कि जिस प्रदेश को पहले बीमारू राज्य की श्रेणी में रखा गया था, वह राज्य अब देश की अर्थव्यवस्था में अपनी ओर से उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।

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